ॐ भगवते वासुदेवाय नमः
कुछ लोग कहते हैं कि
धनहीन लोग क्षुद्र हैं; कुछ कहते हैं कि गुणहीन लोग क्षुद्र हैं; पर,
सभी वेद-पुराण जाननेवाले श्रीव्यास मुनि कहते हैं कि नारायण का (भगवान का) स्मरण न करनेवाले क्षुद्र हैं ।
धनलालसा से जिस तरह धनवान की स्तुति (इन्सान) करता है,
वैसे यदि विश्वकर्ता (भगवान) की करे, तो कौन बंधन मुक्त न हो ?
यम की दूती जरा (बुढापा) कान के करीब आकर बताती है कि
"हे लोगों ! सुनो । परायी स्त्री और पराया धन लेने का खयाल छोड दो,
और रमानाथ (भगवान) के चरणों में ध्यान धरो ।
भगवान की लीलाएँ अद्भुत हैं ।
उनके जन्म, कर्म, और गुण दिव्य हैं ।
उन्हीं का श्रवण, कीर्तन, और ध्यान करना चाहिए ।
सब भगवान के लिए करना सीखना चाहिए ।
ॐ श्री हरि कृष्णाय नमः