जीव (जीवात्मा) और जड (जगत) को कार्य कहा जाता है। परमात्मा (शिव) इनका कारण है, जिसको पति कहा जाता है। जीव पशु और जड पाश कहलाता है। मानसिक क्रियाओं के द्वारा पशु और पति के संयोग को योग कहते हैं। जिस मार्ग से पति की प्राप्ति होती है उसे विधि की संज्ञा दी गयी है। पूजाविधि में निम्नांकित क्रियाएँ आवश्यक है-
हँसना
गाना
नाचना
हुंकारना और
नमस्कार।
संसार में दुखों से आत्यन्तिक निवृत्ति ही दुःखान्त अथवा मोक्ष है।
Wednesday, July 16, 2014
शिव
शिव को नमन
जीवन का रहस्य
तुम्हें मिल सकेगा, अगर नमन के द्वार से तुम गए।
अगर तुम झुके, तुमने प्रार्थना की, तो तुम प्रेम के केन्द्र तक पहुँच पाओगे।
परमात्मा को रिझाना करीब-करीब एक स्त्री को रिझाने जैसा है।
उसके पास अति प्रेमपूर्ण, अति विनम्र, प्रार्थना से भरा हृदय चाहिए। और जल्दी वहाँ नहीं है। तुमने जल्दी की, कि तुम चूके। वहाँ बड़ा धैर्य चाहिए। तुम्हारी जल्दी और उसका हृदय बंद हो जाएगा। क्योंकि जल्दी भी आक्रमण की खबर है।
इसलिए जो परमात्मा को खोजने चलते हैं, उनके जीवन का ढंग दो शब्दों में समाया हुआ है- प्रार्थना और प्रतीक्षा। प्रार्थना से शास्त्र शुरू होते हैं और प्रतीक्षा पर पूरे होते हैं। प्रार्थना से खोज इसलिए शुरू होती है।
ऊँ स्वप्रकाश आनन्दस्वरूप भगवान शिव को नमन !
और अब
इस नमन को बहुत गहरे उतर जाने दें।
ॐ नमः शिवाय
साधना
जहां अध्यात्म ऊर्जा प्रदान करते हुये साधक में उच भाव भूमि प्रदान करती है | वही उसके जीवन की अनेक कमीये दूर हो जाती है | साधना से समाधि जैसा आनंद सहज ही प्राप्त हो जाता है | शरीर हर वक़्त एक विशेष ऊर्जा में आबद्ध रहता है और जीवन में आनंद का सराबोर होता है | हर वक़्त आनंद में ही रहता है | मन के विकारो पे विजय मिलती है और साधना में सफलता |
विधि –
यह साधना आप किसी भी सोमवार शुरू कर सकते है | आप किसी भी मंदिर अथवा घर में कर सकते है | इस के लिए आपको भगवान शिव का एक चित्र चाहिए और रुद्राश की माला और मंदिर में करे तो शिव जी का पूजन कर शिव लिंग के पास बैठ कर कर सकते है | इसे सुबह जा शाम कभी भी किया जा सकता है | चित्र का पूजन धूप दीप नवेद पुष्प फल आदि से करे और घी का दीपक लगाए गुरु पूजन करे फिर गणेश जी का पूजन करे और फिर शिव पूजन करे | इस से पहले चारो दिशयों में ॐ श्रीं ॐ बोल कर जल छिर्क दे इस से दिशा क्षोदन हो जाता है | फिर 5 वार प्राणायाम करे मतलव सांस ले और छोड़ दे ता जो आंतरिक क्षोदन हो जाए फिर रुद्राश माला से निमन मंत्र की 21 माला करे यह साधना आप शिवरात्रि से पहले कभी भी शुरू करे 11 दिन पहले कर सकते है | इस से कम न करे जायदा दिन हो फाइदा ही है और शिवरात्रि तक करे शिवरात्रि को 4 पहर की पुजा करे मतलव रात में 4 वार पुजा की जाती है और हर वार आपको 5 जा 11 माला मंत्र जप करना है | सुबह आरती करे और अपने कार्य कर सकते है | वैसे भी इस मंत्र का जप जायदा से जायदा कर लेना चाहिए इस के बहुत लाभ मैंने महसूस किए हैं | यह साधना शिवरात्रि पे ही नहीं किसी भी सोमवार से शुरू कर 21 दिन में भी की जा सकती है | इस लिए जो शिवरात्रि पे न कर पाये किसी भी सोमवार शुरू कर कर ले |
#मंत्र ---
!! ॐ हँस सोहं परम शिवाए नमः !!
|| om hans soham param shivaye namah ||