Tuesday, July 29, 2014

योग‬

अशान्त व दुःखित मन,
जब
सुव्यवस्थित होकर शान्त व निर्द्वन्द्वतापूर्वक समस्थिति को प्राप्त होता है
उसे ही #योग कहते है।
"गीता २/४८"

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