कांवर एक अटूट आस्था
कंधे पर रंग बिरंगे कांवर, उसमे गंगा जल ढोते, रास्ते भर भक्ति और आस्था मे सराबोर नारे ।
शिवभक्तों की इस भीड को देख सोचना पडता है कि आखिर इनमे कौन सी शक्ति है । बच्चे, बूढे, स्त्री-पुरूष सभी नंगे पैर, पथरीली कच्ची-पक्की सडक पर नदी-नाले पार करते हुए, अंतत: सही समय तक तय कर ही लेते हैं अपना सफर । पांव मे फफोले, पैरों की ऐंठन, जख्म और तलवों की जलन, किसी की भी परवाह न करते हुए भगवान शंकर को अपना जल चढा कर ही दम लेते हैं ।
अटूट आस्था और भक्ति भावना से ओत प्रोत रंग बिरंगी झंडियों, फूल मालाओं से सजी अपनी कांवरों मे रखे ताम्रघट मे यह गंगाजल लेकर चल पड्ते हैं शिव को अर्पित करने के लिए ।
माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शंकर का जलाभिषेक करना एक अलग महत्व रखता है । इनमे कठिन यात्रा की यह शक्ति है भक्ति और अटूट आस्था की ।
भारतीय जनमांनस की आस्था की जडें बहुत गहरी हैं । प्रत्येक काल मे यह श्रध्दा का केन्द्र रहे हैं । इन्हें नाराज करने का साहस देवताओं मे नही है । तांडव नृत्य कर सकते हैं तो भक्ति भावना से प्रशन्न हो कुछ भी देने मे जरा भी संकोच नही करते ।
रावण की भक्ति से प्रशन्न होकर उसे अमोघ शक्ति देने वाले तथा भस्मासुर को वर प्र्दान करने वाले भी यही भगवान शंकर हैं ।
भवानी शंकरौ वंदे
श्रध्दाविश्वास रूपिणैं
याम्यां बिना न पश्यंति सिध्दा
स्वान्त: स्थमीश्वरम ।:
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