साधना
जहां अध्यात्म ऊर्जा प्रदान करते हुये साधक में उच भाव भूमि प्रदान करती है | वही उसके जीवन की अनेक कमीये दूर हो जाती है | साधना से समाधि जैसा आनंद सहज ही प्राप्त हो जाता है | शरीर हर वक़्त एक विशेष ऊर्जा में आबद्ध रहता है और जीवन में आनंद का सराबोर होता है | हर वक़्त आनंद में ही रहता है | मन के विकारो पे विजय मिलती है और साधना में सफलता |
विधि –
यह साधना आप किसी भी सोमवार शुरू कर सकते है | आप किसी भी मंदिर अथवा घर में कर सकते है | इस के लिए आपको भगवान शिव का एक चित्र चाहिए और रुद्राश की माला और मंदिर में करे तो शिव जी का पूजन कर शिव लिंग के पास बैठ कर कर सकते है | इसे सुबह जा शाम कभी भी किया जा सकता है | चित्र का पूजन धूप दीप नवेद पुष्प फल आदि से करे और घी का दीपक लगाए गुरु पूजन करे फिर गणेश जी का पूजन करे और फिर शिव पूजन करे | इस से पहले चारो दिशयों में ॐ श्रीं ॐ बोल कर जल छिर्क दे इस से दिशा क्षोदन हो जाता है | फिर 5 वार प्राणायाम करे मतलव सांस ले और छोड़ दे ता जो आंतरिक क्षोदन हो जाए फिर रुद्राश माला से निमन मंत्र की 21 माला करे यह साधना आप शिवरात्रि से पहले कभी भी शुरू करे 11 दिन पहले कर सकते है | इस से कम न करे जायदा दिन हो फाइदा ही है और शिवरात्रि तक करे शिवरात्रि को 4 पहर की पुजा करे मतलव रात में 4 वार पुजा की जाती है और हर वार आपको 5 जा 11 माला मंत्र जप करना है | सुबह आरती करे और अपने कार्य कर सकते है | वैसे भी इस मंत्र का जप जायदा से जायदा कर लेना चाहिए इस के बहुत लाभ मैंने महसूस किए हैं | यह साधना शिवरात्रि पे ही नहीं किसी भी सोमवार से शुरू कर 21 दिन में भी की जा सकती है | इस लिए जो शिवरात्रि पे न कर पाये किसी भी सोमवार शुरू कर कर ले |
#मंत्र ---
!! ॐ हँस सोहं परम शिवाए नमः !!
|| om hans soham param shivaye namah ||
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