Saturday, August 16, 2014

राधे कृष्णा

श्री कृष्ण कहते हैं -
"जो तुम हो वही मैं हूँ हम दोनों में किंचित भी भेद नहीं हैं।
जैसे दूध में श्‍वेतता, अग्नि में दाहशक्ति और पृथ्वी में गंध रहती हैं
उसी प्रकार मैं सदा तुम्हारे स्वरूप में विराजमान रहता हूँ।"

"श्रीराधा सर्वेश्वरी, रसिकेश्वर घनश्याम।
करहुँ निरंतर बास मैं, श्री वृन्दावन धाम॥"

राधा नाम की महिमा का स्वयं श्री कृष्ण ने इस प्रकार गान किया है-
"जिस समय मैं किसी के मुख से ’रा’ अक्षर सुन लेता हूँ, उसी समय उसे अपना उत्तम भक्ति-प्रेम प्रदान कर देता हूँ और ’धा’ शब्द का उच्चारण करने पर तो मैं प्रियतमा श्री राधा का नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे-पीछे चल देता हूँ"

आधौ नाम तारिहै राधा।
र के कहत रोग सब मिटिहैं, ध के कहत मिटै सब बाधा॥
राधा राधा नाम की महिमा, गावत वेद पुराण अगाधा।
अलि किशोरी रटौ निरंतर, वेगहि लग जाय भाव समाधा॥
"जय श्री राधेकृष्णा"

Sunday, August 10, 2014

ईश्वर

"ॐ हरि ॐ "                                                   ईश्वर
चेतना की वह शक्ति है जो ब्रह्माण्ड के भीतर और बाहर जो कुछ है, उस सब में संव्याप्त है ।।
             उसके अगणित क्रिया कलाप हैं जिनमें एक कार्य इस प्रकृति का- विश्व व्यवस्था का संचालन भी है ।।
            संचालक होते हुए भी वह दिखाई नहीं देता क्योंकि वह सर्वव्यापी सर्वनियंत्रक है ।।
           ईश्वर में विश्वास भय से मुक्त करता है । ईश्वर में अति विश्वास और अपार श्रद्धा से मृत्यु के भय से भी मुक्ति मिलती है ।।
             जल की एक बूँद को महासागर से क्या भय; महासागर में गिरकर बूँद का अस्तित्व महासागर में विलीन हो जायेगा । बूँद भी महासागर बन जायेगी ।।
             हिन्दुत्व का सर्वोच्च विचार प्रलय से भी भयभीत नहीं है क्योंकि उस समय कर्मफल से सबको मुक्ति मिल जाती है ।
                              "ॐ भगवते वासुदेवाय नम:"

Saturday, August 9, 2014

रक्षाबंधन

 ‪रक्षाबंधन‬ पर्व
भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है
इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं
और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए अपना स्नेहाभाव दर्शाते हैं।
 राखी बंधवाते समय इस मंत्र का उच्चारण करें ..
येन बद्धो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चलः॥

रक्षा बंधन की पौराणिक कथा..
देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे।
भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी।
उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया।
संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे।
उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है।
यह धागा धन,शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।
ॐ श्री भगवते वासुदेवाय नम:

Thursday, August 7, 2014

तिरंगा

"कुछ नशा तिरंगे की आन का है
कुछ नशा मात्रभूमि की शान का है

हम लहराएंगे हर जगह तिरंगा
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है "

मेरी जान तिरंगा हैं

ये आन तिरंगा है,
ये शान तिरंगा है,
मेरी जान तिरंगा है,

ये आन तिरंगा है,
ये शान तिरंगा है,
मेरी जान तिरंगा है,

अरमान तिरंगा है,
अभिमान तिरंगा है,
मेरी जान तिरंगा है,
ये आन तिरंगा है,
ये शान तिरंगा है,

याद शहीदोँ की आएगी जब ये ध्वज लहराएँगे
जब ये ध्वज लहराएँगे,

इसके तीनो रंग कयामत
सदियोँ तक लहराएँगे,

आजादी जिनके दम से है
उनका नाम बड़ाएँगे,

उनकी कुरबानी को यारो
हरगिज नहीँ लजाएँगे,

विश्वाश तिरंगा है
वरदान तिरंगा हैै
मेरी जान तिरंगा है,

इसके खातिर कसम है हमको
अपना शीश कटा देँगे,

जितना भी इस जिस्म मेँ बाकि
सारा लहू बहा देँगे,

इसे खातिर जो हम ठानेँगे
करके हम दिखला देँगे,

अपनी धरती के आगे हम
सारा गगन झुका देँगे,
ईमान तिरंगा है
भगवान तिरंगा है,

मेरी जान तिरंगा है
मेरी शान तिरंगा है ।।

Wednesday, August 6, 2014

प्रभू भक्ति

ॐ भगवते वासुदेवाय नमः
कुछ लोग कहते हैं कि
धनहीन लोग क्षुद्र हैं; कुछ कहते हैं कि गुणहीन लोग क्षुद्र हैं; पर,
सभी वेद-पुराण जाननेवाले श्रीव्यास मुनि कहते हैं कि नारायण का (भगवान का) स्मरण न करनेवाले क्षुद्र हैं ।

धनलालसा से जिस तरह धनवान की स्तुति (इन्सान) करता है,
वैसे यदि विश्वकर्ता (भगवान) की करे, तो कौन बंधन मुक्त न हो ?

यम की दूती जरा (बुढापा) कान के करीब आकर बताती है कि
"हे लोगों ! सुनो । परायी स्त्री और पराया धन लेने का खयाल छोड दो,
और रमानाथ (भगवान) के चरणों में ध्यान धरो ।

भगवान की लीलाएँ अद्भुत हैं ।
उनके जन्म, कर्म, और गुण दिव्य हैं ।
उन्हीं का श्रवण, कीर्तन, और ध्यान करना चाहिए ।
सब भगवान के लिए करना सीखना चाहिए ।
ॐ श्री हरि कृष्णाय नमः

Monday, August 4, 2014

“ॐ हनुमते नमः”

.                          “ॐ हनुमते नमः”   
"दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।"

  श्री हनुमान की कृपा व स्मरण से ही आसान हो जाते हैं मुश्किल से मुश्किल काम,
                                      मंगलवार का दिन ऐसे  मंत्र से -
"हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।"
                                    श्री हनुमान के ध्यान से जीवन मंगलमय बनाने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
                              इस दिन श्रीहनुमान का ध्यान ग्रह, मन, कर्म व विचारों के दोषों को दूर कर सुख-सफलता देने वाला माना गया है। 

                              इस मन्त्र का नित्य प्रति १०८ बार जप करने से सिद्धि मिलती है -
” ॐ एं ह्रीं हनुमते रामदूताय लंका विध्वंसनपायांनीगर्भसंभूताय शकिनी डाकिनी विध्वंसनाय
किलि किलि बुवुकरेण विभीषणाय हनुमद्देवाय ॐ ह्रीं श्रीं ह्रौं ह्रां फट् स्वाहा ।”

भारत के प्रधानमंत्री "मोदी"

देश का प्रधानमंत्री
ऐसा होना चाहिए जिसके क्रिया कलापों से और उसकी छवि से देश वासियों का सीना गर्व से फ़ूल जाए उसको देखने के साथ ही अंतर्मन से आवाज आये कि
" हाँ ये है हमारा नेता , ये बदलेगा हमारे जीवन को ,
हमारा नेता धार्मिक हो , हिंदुत्व की मान्यताओं एवं स्वरुप का जीता जागता स्वरुप हो ,
जिस हिंदुत्व और धार्मिकता की अनुभूति से एक सनातनी का रोम रोम पुलकित हो सकता है ,
उसी स्वरुप का उदाहरण हमारा प्रधानमंत्री विदेश जाकर भी दे सकता हो ना की विदेश जाकर सेक्यूलरिज्म का पाठ पढ़ाए .....!!
क्या आपमें से किसी ने आज के पूर्व विदेश में भारत वर्ष के प्रधानमन्त्री का ऐसा स्वरुप देखा है ,
अरे, विदेश में रुद्राक्ष की कंठमाला और भगवा वस्त्र पहने हुए ये इंसान किसी देश का प्रधानमन्त्री है .....
या कोई सिद्ध महापुरुष ,
एक साधू और धर्म स्वरुप 'धर्मात्मा' .....????
  "ॐ नमः शिवाय"

Friday, August 1, 2014

तप

.                      ॐ ॐ ॐ
             हिन्दुत्व मे तप की महत्ता...
मन की प्रसन्नता, सौम्यभाव, मौन, आत्मचिंतन, मनोनिग्रह, भावों की शुद्धि - यह मन का तप कहलाता है ।

उद्वेग को जन्म न देनेवाले, यथार्थ, प्रिय और हितकारक वचन (बोलना), (शास्त्रों का) स्वाध्याय और अभ्यास करना, यह वाङमयीन तप है ।

देवों, ब्राह्मण, गुरुजन-ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा - यह शरीर का तप कहेलाता है ।

यस्माद्विघ्न परम्परा विघटते दास्यं सुराः कुर्वते
कामः शाम्यति दाम्यतीन्द्रियगणः कल्याणमुत्सर्पति ।
उन्मीलन्ति महर्ध्दयः कलयति ध्वंसं च यत्कर्मणां
स्वाधीनं त्रिदिवं करोति च शिवं श्लाध्यं तपस्तप्यताम् ॥
                        अर्थात
जिस से विघ्न परंपरा दूर होती है, देव दास बनते हैं, काम शांत होता है, इंद्रियों का दमन होता है, कल्याण नजदीक आता है, बडी संपत्ति का उदय होता है, जो कर्मो का ध्वंस करता है, और स्वर्ग का कब्जा दिलाता है, उस कल्याणकारी, प्रशंसनीय तप का आचरण करो ।
               "ॐ भगवते वासुदेवाय् नम:"

हे प्राणी धर्म को जान

धर्म को न जानकर मनुष्य दुःखी होता है ।
इस अस्थिर जीवन/संसार में धन, यौवन, पुत्र-पत्नी इत्यादि सब अस्थिर है ।
केवल धर्म, और कीर्ति ये दो हि बातें स्थिर है ।

"धर्मस्य दुर्लभो ज्ञाता सम्यक् वक्ता ततोऽपि च ।
श्रोता ततोऽपि श्रद्धावान् कर्ता कोऽपि ततः सुधीः ॥
                        अर्थात
धर्म को जाननेवाला दुर्लभ होता है, उसे श्रेष्ठ तरीके से बतानेवाला उससे भी दुर्लभ, श्रद्धा से सुननेवाला उससे दुर्लभ, और
धर्म का आचरण करनेवाला सुबुद्धिमान सबसे दुर्लभ है ।।"

"अथाहिंसा क्षमा सत्यं ह्रीश्रद्धेन्द्रिय संयमाः ।
दानमिज्या तपो ध्यानं दशकं धर्म साधनम् ॥
                       अर्थात
अहिंसा, क्षमा, सत्य, लज्जा, श्रद्धा, इंद्रियसंयम, दान, यज्ञ, तप और ध्यान – ये दस धर्म के साधन है ।"

"सुखार्थं सर्वभूतानां मताः सर्वाः प्रवृत्तयः ।
सुखं नास्ति विना धर्मं तस्मात् धर्मपरो भव ॥
                        अर्थात
सब प्राणियों की प्रवृत्ति सुख के लिए होती है, (और) बिना धर्म के सुख मिलता नहि ।
हे प्राणी इस लिए, तू धर्मपरायण बन ।"